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दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में ‘मौजूदा व्यवस्था’ के खिलाफ महासंग्राम रैली में जुटे दलित-पिछ्ड़े और मुस्लिम वर्ग के हजारों लोग जमीअत उलेमा ए हिन्द महासचिव मौलाना महमूद मदनी और दलित चिंतक मान्यवर अशोक भारती के नेतृत्व में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक 18 राज्यो के कार्यकर्ता पहुंचे दिल्ली

नई दिल्ली,27 नवम्बर 2016

 

देशभर में सत्ता और व्यवस्था परिवर्तन की सदैव धूरी बनने वाले ऐतिहासिक रामलीला मैदान में लम्बे समय के बाद रविवार को हुई महासंग्राम रैली में दलित,आदिवासी और अल्पसंख्यक वर्गों के यूपी,उड़ीसा,महाराष्ट्र,मध्यप्रदेश,गुजरात,हरियाणा,पंजाब,राजस्थान,बिहार आदि 18 राज्यों से आए हजारों कार्यकर्ताओं ने सयुंक्त रूप से एकत्रित होकर मौजूदा व्यवस्था और सरकारों को चुनोती देते हुए अपने हक्कों व् अधिकारों की हुंकार भरी।देशभर में मुस्लिम वर्ग की प्रतिष्ठित संस्था जमीअत उलेमा ए हिन्द के नेता व् राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी और जाने माने दलित चिंतक व् नेशनल कांफड्रे्रेशन ऑफ़ दलित आदिवासी ऑर्गनाइजेशन के पूर्व संस्थापक चेयरमैन मान्यवर अशोक भारती के नेतृत्व में इस महारैली का आयोजन किया गया।रामलीला मैदान के मंच से मौजूदा सिस्टम व् सरकारों को ललकारते हुए मौलाना महमूद मदनी ने कहा की देश के हालात दलितों और मुस्लिमों के लिए माकूल नही हैं।सरकारों की मंशा इन वर्गों को तंग करने की है।जिस कारण दिल्ली,यूपी,गुजरात,मध्यप्रदेश और हरियाणा आदि जगहों पर दलितों,आदिवासीयों और अल्पसंख्यकों पर  ज़ुल्म किया जा रहा है तो कहीं इन वर्गों के खिलाफ धर्म और जाती के नाम पर द्वेष फैलाकर इन्हें जिन्दा जलाया जा रहा है।इसलिए दलितों व् अल्पसंख्यको को समय की नजाकत को देखते हुए एक दूसरे का हाथ थाम कर साथ खड़े हो जाना चाहिए। मौलाना मैदानी ने इस अवसर पर मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि हम सत्ता के लिए नहीं बल्कि अपने हालात बदलने के लिए यहां एकत्र हुए हैं, जो हमसे बलिदान चाहती है। उन्होंने घोषणा की कि अगले छह महीने के भीतर उत्तर प्रदेश के हर जिले में संयुक्त बैठक करेंगे और सामाजिक दूरियों को पाट कर देश में जारी अन्याय को कुचल देंगे। उन्होंने कहा कि इस देश में दलित, आदिवासी और मुस्लिम एक हो जाएं तो बड़ी ताकत बन जाएगी और फिर कोई ज़ालिम हमें आंख उठाकर नहीं देख सकता।

मौलाना मदनी ने कहा कि स्वतंत्रता विभाजन के बाद सत्ताधारी बदल गए, लेकिन अन्याय खत्म नहीं हुई, सच्चर कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में यह साबित किया है कि मुसलमान आज की तारीख में आर्थिक और सामाजिक रूप से सबसे निचले पायदान पर हैं। बस देश में आदिवासियों की स्थिति बदतर है, मध्ये भारत में रहने वाले आदिवासी पर कम से कम साल के दो महीने तो ऐसे गुजरते हैं जब उनके पास खाने को अनाज नहीं होता, लोग पेड़ों के पत्ते खाकर गुजारा करते हैं। इन की बस्तियों में अस्पताल है न स्कूल, न बैंक, अब यह अत्याचार किया जा रहा है कि उनके खर्च के जंगल उनसे छीन कर व्यापारियों के हवाले किए जा रहे हैं। ऐसा लगता है कि आदिवासियों का सम्मान छीन ली गई है.
महासंग्राम रैली के सयोंजक दलित चिंतक अशोक भारती ने कहा कि हजारों सालों से इस देश में बहुजन समाज के वर्गो और मुस्लिम भाईयों को जाती और धर्म के नाम पर प्रताड़ित किया जा रहा है।आजादी के बाद कोंग्रेस और बीजेपी ने कई दशकों तक देश पर राज किया लेकिन दलितों,आदिवासियों और अल्पसंख्यकों की समस्याओं का कोई समाधान नही हुआ।उल्टा दलितों और मुस्लिमो को इस देश में जगह-जगह प्रताड़ित करते हुए इन वर्गों के महापुरुषों को अपमानित किया गया।गरीबों और उपेक्षित वर्ग की चीखे व्यवस्था की दीवारों से टकराती रही परन्तु सुनाई किसी को नही दी।

*दलितों-पिछड़ो और आदिवासियों के बाद मुस्लिम वर्ग में छाए डॉ अम्बेडकर और उनका संविधान,मुस्लिम नेताओं का ऐलान मदरसों में कुरान के साथ पढ़ाएंगे भारतीय संविधान*

मुस्लिम समाज के बड़े नेताओं में शुमार मौलाना महमूद मदनी और दलित चिंतक अशोक भारती ने रामलीला मैदान रैली में कहा कि अब देश में बाबासाहब डॉ भीमराव अम्बेडकर का संविधान काम कर रहा और इसी संविधान प्रदत्त अधिकारों और शक्तियों के बलबूते दलित,आदिवासी और अल्पसंख्यक वर्ग के लोग मिलकर देश में नए परिवर्तन की नई इबारत लिखेंगे।मौलाना मदनी ने कहा कि वो रामलीला मैदान में किसी सियासत करने के लिए इक्कठे नही हुए बल्कि व्यवस्था परिवर्तन के इक्कठे हुए है।उन्होंने कहा कि गरीबो को दोस्त और दुश्मन को पहचानना होगा।अन्याय और अत्याचार को रोकना होगा और इसकी शुरुआत दलितों और मुसलमानों को मिलकर करनी होगी।मदनी ने आगे कहा कि मुसलमानों को दलितों से प्रेम करना चाहिए और दलितों की ख़ुशी और गमी में शरीक होते हुए इनके लिये हर सहायता के लिए तैयार रहना चाहिए।
महासंग्राम रैली के सयोंजक मान्यवर अशोक भारती व् मुस्लिम संस्था के प्रमुख ने कहा कि भारत में कई सदियों के बाद डॉ अम्बेडकर द्वारा रचित जनता के लिए जनता का आधुनिक संविधान 26 जनवरी 1950 को अमल में आया था।इस संविधान में देश को चलाने के लिए कार्यपालिका,विधानपालिका और न्यायपालिका को सीमांकन शक्तियां प्रदत्त की गई है।लेकिन दलित-पिछड़ा,आदिवासी और अल्पसंख्यक  वर्ग के विरुद्ध की मानसिकता वाले अहोदेदार लोग संविधान को साइड लाइन करने पर तुले हुए है।और अपनी सीमा से बाहर जाकर शक्तियों का बेज़ा इस्तेमाल कर रहे है जिस कारण गरीब लोग ही नही बल्कि देश के सर्वोच्च न्यायलय के न्यायधीश भी पीड़ा के मारे सार्वजनिक स्थलों पर रो रहे है।मुस्लिम नेताओं ने कहा कि वो समाज के धर्म गुरुओं से अर्ज करेंगे की अब मदरसों में कुरान के साथ भारतीय संविधान रखे और बच्चो को इसकी जरूरी तालीम भी दे।

*अशोक भारती ने महारैली में देशभर में हुई दलितों और मुस्लिमो पर अत्याचार की घटनाओं को रखते हुए सरकारों को ललकारा और संवैधानिक अधिकार मांगे*
रैली संयोजक अशोक भारती ने कहा कि पिछले साल तेलंगाना में रोहित वेमुला की सरकारों ने सांस्थानिक हत्या की,गुजरात के ऊना में दलितों के साथ जो उत्पीड़न किया गया,पंजाब में दलितों के हाथ-पैर काटे गए,हरियाणा में बस्तियां फूंकी गई,गोबर खिलाया गया और दलितों पर तेजाब उड़ेला गया,दादरी में मुस्लिमो को बीफ के बहाने से मारा गया,महाराष्ट में डॉ अंबेडकर के स्मारकों को तोड़ा गया,नोएडा में दलित परिवार को सरेआम निवस्त्र कर दिया गया,मध्य प्रदेश और कश्मीर में निरहि मुस्लिमो का राजकीय आदेशों पर एनकाउंटर किया गया।यह सब देश-दुनियां ने अपनी आँखों के सामने घटित हुए वाक्यों को देखा है।इस देश की बहू संख्यक जनता संविधान में विश्वास करने और धैर्य रखने वाली है इसलिये सरकारें इनके धैर्य की परीक्षा ना ले और इनके संवैधानिक हक्को पर डाका ना डालें।दलित और मुस्लिम वर्ग की जनता मिलकर समय आने पर सरकारों को इसका माकूल जबाब भी देगी।अशोक भारती ने कहा  की जिन्होंने हमारे पढ़ने और रोजगार पर रोक लगाई,पीठ पर झाड़ू बांधी,जिनसे दलितों के सांस्कृतिक व् धार्मिक हित टकराते है उनसे भला  कैसे गठजोड़ हो सकते है।सरकारें नोटबन्दी करके गरीबो को सता रही है।जहाँ सड़के नही वहाँ बैंक कहाँ से आएगा,और बिना बैंक गरीबो को भूखों मारने का प्रयास है।अशोक भारती ने रामलीला मैदान से देश के हुक्मरानों से गरीबो को बराबरी का हक देने की मांग की।रैली संयोजक अशोक भारती ने रामलीला मैदान से ऐलान करते हुए कहा कि वो आज यहाँ से व्यवस्था के खिलाफ महासंग्राम करने की घोषणा करते हुए कहा कि वो देश में 10 लाख मिशनरियों को तैयार करके 2018 में दलित,आदिवासियों और अल्पसंख्यको के देश और राज्यों में व्यवस्था को बदलने वाले सम्मेलन करेंगे।रैली मंच से सयोंजक अशोक भारती ने दलितों-आदिवासियों पर हुए पिछले कुछ सालों के उत्पीड़नों का रिकार्ड भी रखा।

*देश में दलितों और मुस्लिमो के नए राजनितिक गठजोड़ का संकेत दे गई रामलीला मैदान की सफल महासंग्राम रैली*
-चुनावी समय में सदूर क्षेत्रों से  आकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान महासंग्राम रैली में हजारों की संख्या में एकत्र हुए दलित,आदिवासी और मुस्लिम समाज की भीड़ देश में नए राजनितिक गठजोड़ के संकेत दे गई।दलित समाज के राष्ट्रीय स्तर के बड़े नेताओ में शुमार प्रसिद्ध दलित चिंतक मान्यवर अशोक भारती की पिछले कुछ दिनों में मुस्लिम समाज की बड़ी संस्थाओं के साथ लख़नऊ और अजमेर आदि जगहों में हुई भाईचारे की रैलियों से दलितों और मुस्लिमो में बढ़ती नजदीकियों का अहसास होता है,जिस कारण आने वाले समय में नए समीकरणों का उदय हो सकता है।अशोक भारती ने कहा कि वो डॉ अम्बेडकर और साहब कांशीराम के समाजिक आंदोलन का रामलीला मैदान से फिर से आगाज कर रहे है।उनका उद्देश्य  दलित और मुस्लिम गठजोड़ खड़ा करके देश में लम्बी लड़ाई लड़ने और नए समीकरण पैदा करना है ताकि इन उपेक्षित वर्गो को उनका हक मिल सके।

*18 राजयों के दलित और मुस्लिम नेताओं ने रैली में भरी हुंकार,*
महासंग्राम रैली को दलितों और मुस्लिमों की सेंकडो संस्थाओं के पदाधिकारियों ने सम्बोधित किया।जिसमें देश के कोने -कोने से आए यूपी से जमियत उलेमा ए हिन्द के अध्यक्ष मौलाना मतिरूल हक़ कुरैशी,दिल्ली अल्पशंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन मोहम्द कमाल फारुखी,वेस्ट बंगाल से नैक्डोर अध्यक्ष सुभाष सिंह,दिल्ली से राष्ट्रीय दलित महिला आंदोलन से सुमेधा बौद्ध और अनीता गुजराती, मध्यप्रदेश से दलित आदिवासी भूमि अधिकार आंदोलन के नेता छोटू कोल,उड़ीसा से जटिया दलित महासभा के लिटु दास,यूपी की अंबेडकर महासभा से लालजी निर्मल,ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड से मर्तिल हक कुरैशी,कर्नाटक के दलित संघर्ष समिति से श्री अन्नाह,गुजरात के दलित सम्मान सँघर्ष मंच से डॉ जयंती मकोड़िया,छतीसगढ़ से बसपा के पूर्व विधायक डॉ छवि लाल रात्रे,राष्ट्रीय दलित महिला आंदोलन से रजनी तिलक,राजस्थान से राष्ठट्रीय मूलनिवासी संघ ए बी पॉल, दिल्ली से समता सैनिक दल के बीड़ी सुजात, नागालैंड के नैक्डोर स्टेट सयोंजक शाषक घटराज,अरुणाचल प्रदेश से शरीफ निमासो,सिक्कम से सरिता थातल, पंजाब से एससी-बीसी एम्प्लाईज फेडरेशन के अमरीक सिंह बांगड़,हरियाणा से नैक्डोर प्रतिनिधि सुरेश टांक,महाराष्ट्र से ओबीसी मुक्ति मोर्चा के नितिन चौधरी,हरियाणा नैक्डोर सदस्य पूनम बौद्ध,बिहार से ऑल इंडिया मनरेगा मज़दूर यूनियन के देवेंद्र कुमार,हरियाणा से हरियाणा वाल्मीकि महासभा के राकेश बहादुर व् अन्य वक्तागण ने उपस्थित लोगों को सम्बोधित किया।इस अवसर पर उड़ीसा व् बिहार आदि की टीम ने सांस्कृतिक कार्यक्रम करके जनचेतना पैदा की।