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फिरकापरस्त ताकतों को कामयाब नहीं होने देंगे

October 28, 2017

जमियत उलमा हिन्द के नेतृत्व में  इन्दिरा गांधी इन्डोर स्टेडियम नई दिल्ली में अमन व एकता सम्मेलन 

नई दिल्ली 29 अक्तूबर


आज यहां जमियत उलमा हिन्द के नेतृत्व में इन्दिरा गांधी इन्डोर स्टेडियम नई दिल्ली में अमन व एकता सम्मेलन सफलता पूर्वक सम्पन्न हूआ जिसमें हिन्दू मुस्लिम सिक्ख इसाई सहित सभी धर्मों के नेताओं विद्वानों ने भाग लिया ं। इस अवसर पर एक संयुक्त घोषणा पत्र पढा गया जिसके बाद स्टेडियम में मौजूद सभी लोगों ने हाथ उठाकर प्रण किया किया कि वह शान्ति और मोहब्बत को बढाने के लिए हर संभव संघर्ष करेगें। स्पस्ट रहे कि घोषणापत्र में प्रण किया गया है कि जहां कहीं भी हिंसा घृणा अलगाववाद और भेदभाव पायेगें उसकोे दूर रोकने के लिए अपनी भूमिका निभाएगें । घोषणापत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि मासूम बच्चों औरतों और पुरूषों पर किसी भी प्रकार की हिंसा कथित और व्यवहारिक रूप में ,भारतीयता,मानवता और इस्लाम के विरूद्व है इस सम्मेलन में जहां दारूल उलूम देवबन्द ,नदवातुल उलमा,अजमेर शरीफ, गुलबर्गा शरीफ, और सरहिन्द शरीफ की गणमान्य हस्तियों ने भाग लिया वहीं प्रसिद्ध हिन्दू नेता स्वामी चितानन्द सरस्वती,जत्थेदार अकाल तख्त अमृतसर के नेता सिंह साहब ज्ञानी गुरूवचन सिंह जी,स्वामी मितरानन्द जी ,आचार्य लोकेश मुनि,सदगुरू ब्रहमीशानन्द आचार्य स्वामी जी, बुद्धिस्ट नेता ड्र्ेकिंग कियाबगुचिटसांग रेनपू चे जी आदि भी शामिल हुए । इस सम्मेलन में जमियत उलमा हिन्द के जश्न शताब्दि वर्ष के लिए लोगो यानि चिन्ह को भी लांच किया गया । 
इस अवसर पर अध्यक्षीय भाषण में जमियत उलमा हिन्द के अध्यक्ष मौलाना कारी सैयद मोहम्मद उसमान मन्सूरपूरी ने कहा कि साम्प्रदायिकता इस देश की उन्नति के मार्ग मे सबसे बढी रूकावट है। इसलिए जमियत उलमा हिन्द तीन स्तर पर अपनी बात रखना चाहती है सबसे पहली गुजारिश तो सरकार से है हम सरकार से मांग करते हैं कि देश में साम्प्रदायिकता फैलाने और विभन्न घृणाप्रद शीर्षकों की आड. में ,अल्पसंख्यकों,दलितों या कमजोर वर्गों की जिन्दगी कष्टदायी बनाने वाले सारे तत्वों और संगठनों पर पहली क्षण में सम्पूर्ण प्रतिबन्ध लगाए और उनकी गतिविधियों पर गहरी नजर रखे। अध्यक्ष जमियम उलमा हिन्द ने मौजूदा हालात पर चिन्ता प्रकट करते हुए कहा कि अगर यह अंधेर नगरी जारी रही और बेकसूर लोगों के साथ अत्यचार होते रहे तो देश उन्नति के मार्ग पर प्रशस्त नहीं हो सकता । दूसरी गुजारिश सारे राजनीतिज्ञ, चिन्तकों, समाजी संगठनों और प्रिन्ट व इलक्ट्र्ानिक मीडिया से है कि वह अपने राजनीतिक ,निजि  या कारोबारी हितोे से उपर उठ कर मोहब्बत के सन्देश को फैलाए। तीसरी गुजारिश  मिल्लते इस्लामिया के सारे लोगों ,संगठनों से है कि मौजूदा हालात मेें हर प्रकार की निराशा और वैचारिक उत्तेजना से अपने आपको बचा कर इस्लामी शिक्षाओं पर पूरी तरह  प्रतिबद्ध हों और इस्लामी परम्पराओं ,आदेशों के अनुसार सारे धर्मो के मानने वालों के साथ सद व्यवहार का पालन करें।
जमियत उलमा हिन्द के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने घोषणापत्र प्रस्तुत करते हुए विशेष रूप से शान्ति ,प्रेम और भाई चारे को बढावा देने का प्रण किया । मौलाना मदनी ने स्टेज पर मौजूद सभी धर्मों के नेताओं की तरफ संकेत करते हुए कहा कि आज यहां देवबन्द भी मौजूद है और ऋषिकेश भी ,यह प्रकट करता है कि इस देश की बहुसंख्या शान्ति प्रियता पर निर्भर है अगर कोई हमारे चमन को उजाडने की कोशिश करेगा तो इस देश की बहुसंख्या एसे लोगों के इलाज करने की ताकत रखती है । मैं इन तमाम हजरात के सामने यह कहना चाहता हूं कि हिन्दुस्तान के मुसलमानों को सब से बडी अगर कोई जरूरत है तो हिन्दू सिक्ख इसाई और पारसी भाईयों की मोहब्बत है.

 

परर्माथ निकेतन, ऋषिकेश के नेतृत्वकारी स्वामी चेदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि आज हम यहां इसलिए इकट्ठे हुए हैं ताकि पूरी दुनिया को पैगाम दिया जाए कि हम सब एक हैं और हमारा देश शांति और व्यवस्था में सबसे आगे है। उन्होंने जमीयत उलमा ए हिन्द के इस आंदोलन की तारीफ करते हुए कहा कि यह वह संगठन है जो सौ साल से गालियां खाकर भी लोगों को गले लगाने का काम करती है। स्वामी चेदानन्द ने आतंकवाद को इस्लाम से जोड़ने की निंदा करते हुए कहा कि कुछ लोगों के गलत कामों के लिये इस्लाम जैसे धुरंधर शांतिपूर्ण धर्म को बदनाम नहीं किया जा सकता उन्होंने कहा कि इस्लाम ने ही दुनिया की सारी मखलूक को खुदा का एक कुन्बा करार दिया है। सारे इंसानों को एक दूसरे के साथ षांति व भाईचारे के साथ रहने का निर्देश दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आज का यह जलसा दिलों को जोड़ने का काम करेगा। उन्होंने इस मौके पर एक नन्हें पौधे को लगाने पर जोर दिया।


जत्थेदार अकाल तख्त, अमृतसर के जिम्मेदार मुख्य सिंह साहब ज्ञानी गुरबचन सिंह जी ने अपने संबोधन में कहा कि सारे धर्म शांति भाईचारे की एक शिक्षा पर सहमत हैं और सारे धर्मों का आधार सिर्फ एक खुदा पर है। उन्होंने अपने पैगाम में जमीयत उलमा ए हिन्द के इस कदम की तारीफ की और कहा कि तूफान में प्रेम का दीपक जलाना ही मूल बहादुरी का काम है। सरग्रोबर हमेशानन्दचार्य स्वामी जी ने इस बात पर जोर दिया कि नफरत की शिक्षा देने वाले हर धर्म के दुश्मन हैं, उन्ही किसी धर्म से न जोड़ा जाए बल्कि मतभेद भुलाकर संयुक्त रूप से समाधान किया जाए। स्वामी मित्रानंन्द जी, आचार्य, चिन्मया मिशन चेन्नई ने कहा कि आज का यह सम्मलेन पैगाम देता है कि धर्म हरगिज आपस में लड़ने-झगड़ने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने कहा कि आज के कार्यक्रम की तस्वीर जब विश्व के सामने जाएगी, तो उसके जरिये ये पैगाम भी जाएगा कि भारत की जमीन लोगों को जोड़ने का काम करती है।


विष्वस्तरीय प्रख्यात बुद्धिजीवी, चिंतक एवं समाज सुधारक मौलाना सैयद अरशद मदनी अध्यक्ष जमीयत उलमा ए हिन्द ने कहा कि हम ये सार्वजनिक रूप से कहते हैं कि नफरत की राजनीति करने वाले सभी लोग देश के गद्दार हैं, अगर देश चल सकता है तो केवल प्यार व मोहब्बत से चल सकता है अन्यथा देश तबाह हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार चाहती तो घृणा फैलाने वालों पर रोक लगा सकती थी लेकिन वर्तमान सरकार को देश की शांति और व्यवस्था की कोई परवाह नहीं है।


उनके अलावा अन्य सभी वक्ताओं ने ऐसे सम्मेलन की आवष्यकता और जरूरत पर प्रकाश डाला और कहा कि भारत हमेशा से शांति व एकता का आदर्श देश रहा है, इसलिए इस एकता को बचाये रखने के लिये हर संभव संघर्ष होगा। आज के इस अवसर पर संबोधित करने वालों में विशेष रूप से दीवान जेनुलआबिदीन सज्जादा नशीन दरगाह अजमेर शरीफ, मौलाना जलाल उद्दीन उमरी जमाते इस्लामी हिन्द, मौलाना मुफ्ती सुफियान कासमी, प्रबंधक दारूल उलूम वक्फ देवबंद, मौलाना सईर्दुरहमान, प्रबंधन दारूल उलूम नदवातुल उलमा लखनऊ, मौलाना अब्दुल्ला मुगेसी, प्रोफेसर षंकर सान्याल जी , नवेद हामिद, पंडित एन के शर्मा जी, स्वामी मित्रानन्द जी, आचार्य, चिन्मया मिशन चेन्नई, सरग्रोबर हमेशानन्दचार्य स्वामी जी, श्री कशेतरा तपोभूमि गुरूपीठ गोवा, सिंह साहब ज्ञानी गुरूबचन सिंह जी, चीफ जत्थेदार अकाल तख्त, अमृतसर, श्री ड्रेकिंग क्याबगो चेस्टसाँग रेपोंची जी, स्वामी चेदानन्द सरस्वती जी, अध्यक्ष, परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश, डॉक्टर मुजतबा फारुख, प्रोफेसर अख्तरउल वासे, मौलाना सैयद हाफिज अतहर अली मुंबई, सैयद कासिम रसूल इलियास, सलमान चिश्ती अध्यक्ष ख्वाजा गरीब नवाज फाउंडेशन, अजमेर, कमाल फारूकी, डॉक्टर चंद्रपाल, मौलाना मुफ्ती सैयद मोहम्मद सलमान मंसूरपुरी,  मौलाना मतीनुल हक ओसामा कानपुर, मुफ्ती इफ्तिखार अहमद कर्नाटक, मौलाना हाफिज नदीम अहमद सिद्दीकी महाराष्ट्र, मौलाना असरारुल हक कासमी, मौलाना बदर उद्दीन अजमल असम, अशोक भारतीय नेकडोर, प्रोफेसर मोहसिन उस्मानी, अल्हाज वाहिद हुसैन शाह अंगारा चिश्ती, दरगाह अजमेर शरीफ, पेगाम खुसरो मियाँ, सज्जादा नशीन, गुलबर्ग शरीफ, सैयद मोहम्मद सादिक रजा, सज्जादा नशीन दरगाह मजदालिफ साई सरहिन्द शरीफ, पीर ख्वाजा अहमद निजामी सैयद बुखारी दरगाह ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया, दिल्ली, मौलाना नियाज अहमद फारूकी, मौलाना हकीमुद्दीन कासमी आदि ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर जमीयत उलमा ए हिन्द के सभी प्रांतों के जिम्मेदार पदाधिकारी भी मौजूद थे।

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